vedang`s music

Harmonious, melodic, tuneful vibrations of the age old divine sounds, which has contemplative stupendous effect on mind, body and surroundings in the nature. It is a meditation. Based on breathing exercise Pranayam(naad yoga) .Breathing which inhales and excels for longer gives more oxygen to the body.Alap is the soul of the Raga. It shows the caliber of the musician. His capacity of intellection, mind’s eye, how far he could think of the boundaries of the thought with creative combination of melodic notes set to the rhythem.It takes years of practice to get command on the scale to perform freely. Every days practice brings the different shades to the raga, fulfillment of intense happiness, ecstasy, exaltation, euphoria the total bliss.Experience of supreme sound the Naad Brahma. About me- Performing vocals for last many years around the globe. Taught music in USA for ten years including one of the prestigious universities(MUM) at Fairfield Iowa. Worked for the Radio in North America as producer and host(musicals). http://www.youtube.com/user/MsVedang

Friday, September 11, 2026

वेदांग धाराशिवे ।

 


वेदांग धाराशिवे

भारतीय शास्त्रीय गायक • संगीत शिक्षक • कलाकार • सांस्कृतिक दूत

वेदांग धाराशिवे भारतीय शास्त्रीय गायक, संगीत शिक्षक, कलाकार तथा भारत की प्राचीन संगीत परंपरा के समर्पित प्रचारक हैं।

उनके जीवन के कार्य का आधार एक सरल, किंतु अत्यंत गहन विश्वास है—भारतीय शास्त्रीय संगीत केवल प्रस्तुत किए जाने वाली कला नहीं है; यह नाद, चेतना, साधना, अनुशासन और अंतर्मन के अनुभव की एक जीवंत परंपरा है।

दशकों से उन्होंने भारत और विदेशों में भारतीय शास्त्रीय संगीत को श्रोताओं तक पहुँचाने का कार्य किया है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में संगीत शिक्षा को प्रोत्साहित करने का प्रयास भी निरंतर किया है। वर्तमान समय में उनका कार्य विशेष रूप से विलेज म्यूज़िक क्लब, आलमला तथा उनके व्यापक डिजिटल माध्यमों से जुड़ा हुआ है।

प्रारंभिक संगीत-दृष्टि

वेदांग धाराशिवे की संगीत-दृष्टि केवल पारंपरिक मंचीय प्रस्तुति तक सीमित नहीं है।

भारतीय शास्त्रीय संगीत पर अपने लेखन में वे भारतीय संगीत के स्वर-स्पंदनों को मन, शरीर और वातावरण पर पड़ने वाले चिंतनशील प्रभाव से जोड़ते हैं। वे संगीत-साधना को श्वास, प्राणायाम, नादयोग और नाद ब्रह्म के अनुभव से संबंधित मानते हैं।

उनके विचार में आलाप राग की आत्मा है। आलाप में दिखाई देने वाली स्वतंत्रता और सृजनशीलता वर्षों की अनुशासित साधना, गहन श्रवण और स्वर पर निरंतर विकसित होती पकड़ का परिणाम है।

उनका दीर्घकाल से संचालित संगीत-केंद्रित ब्लॉग उनके संगीत और दार्शनिक चिंतन का दस्तावेज़ है, जिसमें गायन, राग, बंदिशें तथा संगीत, ध्यान और भारतीय ज्ञान-परंपराओं से संबंधित विचार प्रकाशित होते रहे हैं।

भारतीय शास्त्रीय गायन

गायक के रूप में वेदांग ने अनेक वर्षों तक हिंदुस्तानी/भारतीय शास्त्रीय गायन की साधना और प्रस्तुति को समर्पित जीवन जिया है।

उनके ऑनलाइन संग्रह में यमन, मालकौंस, मियाँ मल्हार, दरबारी, चारुकेशी आदि अनेक रागों की प्रस्तुतियाँ और चर्चाएँ उपलब्ध हैं। उनके प्रकाशित साहित्य में राग-प्रस्तुति से संबंधित बंदिशें और व्याख्याएँ भी सम्मिलित हैं।

उनके लिए राग केवल स्वरों का समूह नहीं है।

राग एक ऐसा संगीत-ब्रह्मांड है, जिसमें स्वर, लय, श्वास, भाव, कल्पना और चेतना एक साथ मिलकर अभिव्यक्त होते हैं।

वे निरंतर इस बात पर बल देते हैं कि राग में प्रवीणता निरंतर साधना से प्राप्त होती है। प्रत्येक दिन की साधना उसी राग के भीतर नई संभावनाओं का उद्घाटन करती है।

अंतरराष्ट्रीय संगीत-यात्रा

वेदांग धाराशिवे के व्यावसायिक जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग भारत के बाहर के श्रोताओं से जुड़ा रहा है।

उनके प्रकाशित जीवन-वृत्त के अनुसार, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शास्त्रीय गायन की प्रस्तुतियाँ दी हैं तथा लगभग दस वर्षों तक संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय संगीत का अध्यापन किया है। वे विशेष रूप से महार्षि यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट, फेयरफ़ील्ड, आयोवा में अपने अध्यापन का उल्लेख करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय अनुभव उनके लिए संगीत को एक सार्वभौमिक भाषा के रूप में समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बना।

वे भारतीय शास्त्रीय संगीत को केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में नहीं देखते, बल्कि ऐसी ज्ञान-परंपरा के रूप में प्रस्तुत करते हैं जो भौगोलिक और सांस्कृतिक सीमाओं से परे मनुष्यों के साथ संवाद स्थापित कर सकती है।

अमेरिका के वर्ष और संगीत शिक्षा

संयुक्त राज्य अमेरिका में बिताए गए वर्ष उनके संगीत और शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय हैं।

इस अवधि में उन्होंने संगीत-शिक्षण के साथ-साथ ध्यान और भारतीय ज्ञान-परंपराओं में अपनी व्यापक रुचि को भी आगे बढ़ाया।

उन्होंने उत्तर अमेरिका के रेडियो क्षेत्र में भी संगीत कार्यक्रमों के निर्माता और प्रस्तोता के रूप में कार्य किया। इससे उन्हें केवल कलाकार और शिक्षक ही नहीं, बल्कि संप्रेषक और प्रसारक के रूप में भी अनुभव प्राप्त हुआ।

इन अनुभवों से उनके कार्य में एक विचार निरंतर प्रबल होता गया:

भारतीय संगीत को केवल संरक्षित नहीं किया जाना चाहिए—उसे सिखाया, अनुभव किया और अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाया जाना चाहिए।

विलेज म्यूज़िक क्लब, आलमला

वेदांग धाराशिवे के कार्य का एक विशिष्ट पक्ष है—विलेज म्यूज़िक क्लब, आलमला।

यह संकल्पना भारतीय शास्त्रीय संगीत को पारंपरिक महानगरीय संगीत-मंचों से आगे, ग्रामीण समाज तक पहुँचाने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

गाँव उनके लिए केवल एक दूरस्थ स्थान नहीं, बल्कि ऐसा केंद्र है जहाँ शास्त्रीय संगीत को सुना, सीखा, समझा और प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया जा सकता है।

इस प्रयास के माध्यम से संगीत केवल कुछ विशिष्ट सांस्कृतिक केंद्रों तक सीमित न रहकर सामुदायिक गतिविधि का रूप ग्रहण करता है।

भारतीय शास्त्रीय संगीत के संदर्भ में यह विचार विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह उस दीर्घकालीन चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है जिसमें गंभीर शास्त्रीय संगीत उन लोगों तक भी पहुँचे, जिन्हें सामान्यतः इसे सुनने या सीखने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते।

उनकी सार्वजनिक व्यावसायिक पहचान में आज भी विलेज म्यूज़िक क्लब, आलमला तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत के वैश्विक प्रचार-प्रसार को प्रमुख स्थान प्राप्त है।

सभी के लिए संगीत

वेदांग के सार्वजनिक कार्य से जुड़ा एक प्रमुख विचार है:

“संगीत सभी के लिए।”

यह विचार उनके संगीत समारोहों, शिक्षण, सामाजिक माध्यमों और ऑनलाइन प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न वर्गों के श्रोताओं तक पहुँचने के प्रयासों में दिखाई देता है।

उनके कार्य की दो समानांतर दिशाएँ हैं:

परंपरा का संरक्षण
और
उस परंपरा के श्रोताओं का विस्तार।

वे परंपरा और आधुनिक तकनीक को एक-दूसरे का विरोधी नहीं मानते। इसके विपरीत, वे डिजिटल माध्यमों का उपयोग पारंपरिक संगीत को आधुनिक वैश्विक समाज तक पहुँचाने के लिए करते हैं।

संगीत, ध्यान और नाद ब्रह्म

उनकी संगीत-दृष्टि में आध्यात्मिक आयाम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

वेदांग भारतीय शास्त्रीय संगीत को नाद ब्रह्म—नाद के माध्यम से दिव्य अनुभव से जोड़ते हैं।

उनके लेखन में संगीत-साधना को श्वास, एकाग्रता, स्वर और सृजनात्मक चेतना से जुड़ी एक चिंतनशील प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इस दृष्टिकोण में संगीत के कई स्तर हैं:

ध्वनि → स्वर → राग → एकाग्रता → ध्यान → अंतर्मन का अनुभव

इसी कारण उनके कार्य में भारतीय शास्त्रीय संगीत, ध्यान, योग और गांधर्ववेद बार-बार एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई देते हैं।

उनकी संगीत-दृष्टि भारतीय ज्ञान-परंपरा की उस व्यापक समझ से संबंधित है जिसमें ध्वनि केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि चेतना के परिष्कार का साधन भी बन सकती है।

गांधर्ववेद

वेदांग धाराशिवे की संगीत-दृष्टि में गांधर्ववेद का महत्वपूर्ण स्थान है।

वे संगीत परंपरा को प्रकृति के क्रम तथा ध्वनि, लय और सामंजस्य के पारस्परिक संबंध से जोड़कर देखते हैं।

गांधर्ववेद में उनकी रुचि ध्यान और महार्षि परंपरा से जुड़े उनके व्यापक अनुभव से भी संबंधित है।

इस प्रकार उनके कार्य में निम्नलिखित धाराएँ एक साथ दिखाई देती हैं:

  • हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन
  • वैदिक संगीत परंपराएँ
  • ध्यान
  • नादयोग
  • संगीत शिक्षा
  • अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान

कलाकार के साथ-साथ शिक्षक

वेदांग के कार्य की सबसे प्रमुख विशेषताओं में से एक यह है कि उन्हें केवल मंचीय गायक के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता।

वे संगीत के सिद्धांतों और उसकी अंतर्निहित प्रक्रिया को सिखाने तथा समझाने में भी उतनी ही रुचि रखते हैं।

उनकी ऑनलाइन सामग्री में राग-प्रस्तुतियाँ, बंदिशें, संगीत संबंधी चर्चाएँ तथा शैक्षणिक सामग्री शामिल हैं।

उनका संगीत-केंद्रित ब्लॉग अनेक वर्षों से सक्रिय रहा है और आज भी संगीत से संबंधित सामग्री का संग्रह प्रस्तुत करता है। उनकी नवीन प्रविष्टियाँ दर्शाती हैं कि इस माध्यम का उपयोग आज भी सांस्कृतिक, संगीतात्मक और दार्शनिक विषयों के लिए किया जा रहा है।

उनकी कार्य-पद्धति को इस प्रकार समझा जा सकता है:

प्रस्तुति → शिक्षण → व्याख्या → साझा करना → संरक्षण → विस्तार।

डिजिटल युग

वेदांग ने इंटरनेट को अपने संगीत-कार्य के दूसरे मंच के रूप में व्यापक रूप से अपनाया है।

उनकी प्रारंभिक ऑनलाइन उपस्थिति में MsVedang नाम से संचालित यूट्यूब चैनल भी शामिल था, जिसका उल्लेख उनके दीर्घकाल से संचालित संगीत ब्लॉग में मिलता है।

वर्तमान में उनकी सार्वजनिक गतिविधियाँ यूट्यूब, लिंक्डइन तथा अन्य सामाजिक माध्यमों तक विस्तृत हैं।

उनकी लिंक्डइन पहचान में वे “Vedang B Dharashive (Musician)” के रूप में प्रस्तुत होते हैं और उनकी नवीन गतिविधियों में भारतीय शास्त्रीय संगीत के वैश्विक प्रचार-प्रसार पर स्पष्ट बल दिखाई देता है।

यह डिजिटल विस्तार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से ग्रामीण भारत में सक्रिय एक संगीत साधक विश्वभर के श्रोताओं से सीधे संवाद कर सकता है।

ग्रामीण भारत और वैश्विक श्रोता

वेदांग धाराशिवे के कार्य की सबसे रोचक विशेषताओं में से एक है—दो दिखाई देने वाली विपरीत दिशाओं का सुंदर संगम:

गाँव और विश्व।

विलेज म्यूज़िक क्लब, आलमला स्थानीय और सामुदायिक आयाम का प्रतिनिधित्व करता है।

यूट्यूब और अन्य डिजिटल माध्यम वैश्विक आयाम का प्रतिनिधित्व करते हैं।

दोनों मिलकर एक सेतु का निर्माण करते हैं:

आलमला → महाराष्ट्र → भारत → विश्व।

उद्देश्य यह नहीं है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत को विदेशों तक पहुँचाते समय उसकी जड़ों से दूर हो जाएँ। इसके विपरीत, उद्देश्य इन जड़ों को और सुदृढ़ करना तथा उनकी संगीतात्मक अभिव्यक्ति को अधिक दूर तक पहुँचाना है।

सांस्कृतिक दूत

इस दृष्टि से वेदांग धाराशिवे को भारतीय शास्त्रीय संगीत के सांस्कृतिक दूत के रूप में देखा जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके अध्यापन और प्रस्तुतियों ने भारतीय संगीत को भारत से बाहर के श्रोताओं तक पहुँचाया, जबकि उनकी वर्तमान डिजिटल गतिविधियाँ आधुनिक तकनीक के माध्यम से उसी उद्देश्य को आगे बढ़ा रही हैं।

उनके सार्वजनिक कार्य में तीन विचार निरंतर दिखाई देते हैं:

भारतीय शास्त्रीय संगीत का संरक्षण होना चाहिए।

भारतीय शास्त्रीय संगीत का शिक्षण होना चाहिए।

भारतीय शास्त्रीय संगीत विश्वभर तक पहुँचना चाहिए।

समकालीन कार्य

उनकी वर्तमान सार्वजनिक गतिविधियों का केंद्र भारतीय शास्त्रीय संगीत, संगीत शिक्षा और विलेज म्यूज़िक क्लब, आलमला है।

उनकी नवीन ऑनलाइन गतिविधियाँ संगीत समारोहों, भारतीय कला एवं संस्कृति तथा शास्त्रीय संगीत के वैश्विक प्रसार के प्रति उनकी निरंतर सक्रियता को दर्शाती हैं।

उनका ऑनलाइन संग्रह अब केवल प्रस्तुतियों का संग्रह नहीं रह गया है। यह एक विकसित होता हुआ डिजिटल भंडार बन चुका है, जिसमें शामिल हैं:

  • राग प्रस्तुतियाँ
  • बंदिशें
  • शास्त्रीय गायन
  • संगीत शिक्षा
  • भारतीय संगीत पर चिंतन
  • गांधर्ववेद
  • ध्यान
  • भारतीय सांस्कृतिक विषय
  • संगीत संबंधी विचार एवं चर्चाएँ

उनका व्यापक योगदान

वेदांग धाराशिवे के कार्य का महत्व केवल प्रस्तुतियों की संख्या या ऑनलाइन श्रोताओं की संख्या में नहीं है।

इसका वास्तविक महत्व एक निरंतर चलने वाले संकल्प में है।

उन्होंने भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, रेडियो, विश्वविद्यालयों, गाँवों, संगीत-मंचों और आज के डिजिटल माध्यमों—अनेक अलग-अलग परिवेशों में कार्य किया है, किंतु उनके कार्य का केंद्रीय विषय एक ही रहा है:

भारतीय शास्त्रीय संगीत।

उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि एक प्राचीन संगीत परंपरा अपनी मूल पहचान को बनाए रखते हुए पीढ़ियों, देशों और तकनीकी माध्यमों के बीच यात्रा कर सकती है।

कार्य के पीछे की संगीत-दृष्टि

वेदांग धाराशिवे के कार्य के केंद्र में यह विश्वास है कि संगीत मानव के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

उनके लिए संगीत की अनुशासित साधना निम्न गुणों का विकास कर सकती है:

एकाग्रता, सृजनशीलता, संवेदनशीलता, भाव-संस्कार, ध्यान और अंतर्मन की शांति।

इसी कारण वे संगीत को ध्यान और नाद ब्रह्म की व्यापक अवधारणा से जोड़ते हैं।

इस दृष्टिकोण में संगीत की यात्रा ध्वनि से आरंभ होती है, किंतु आवश्यक नहीं कि ध्वनि पर ही समाप्त हो।

संगीत अंतर्मन की एक यात्रा बन सकता है।

विरासत और निरंतर संकल्प

वेदांग धाराशिवे की यात्रा अभी भी निरंतर जारी है।

उनका वर्तमान कार्य—विशेषकर विलेज म्यूज़िक क्लब, आलमला और तेजी से विस्तृत होता उनका डिजिटल संसार—उनके लंबे समय से चले आ रहे संगीत-संकल्प का नया चरण है।

माध्यम बदल गए हैं।

श्रोताओं का विस्तार हुआ है।

भौगोलिक सीमाएँ छोटी हो गई हैं।

लेकिन केंद्रीय उद्देश्य आज भी वही है:

भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रचार एवं प्रसार।

या उनके अपने प्रिय भाव में:

“भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रचार एवं प्रसार ही एकमात्र उद्देश्य।”

उनका संपूर्ण कार्य प्राचीन भारतीय संगीत-ज्ञान को आधुनिक वैश्विक समाज से जोड़ने का एक सतत प्रयास है—ऐसा प्रयास जिसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत अपनी साधना, अनुशासन, ज्ञान और जीवंत अनुभूति के साथ अपनी मूल जड़ों से जुड़ा रहता है।

संक्षिप्त विरासत-वक्तव्य

वेदांग धाराशिवे भारतीय शास्त्रीय गायक, संगीत शिक्षक, कलाकार और सांस्कृतिक दूत हैं, जिन्होंने दशकों से भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को सीमाओं और पीढ़ियों के पार पहुँचाने का कार्य किया है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में संगीत-शिक्षण और उत्तर अमेरिकी रेडियो में कार्य करने से लेकर विलेज म्यूज़िक क्लब, आलमला की स्थापना तथा आधुनिक डिजिटल माध्यमों को अपनाने तक, उनकी पूरी यात्रा एक ही उद्देश्य के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है—भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहन और समृद्ध विरासत को अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाना।

उनकी संगीत-दृष्टि राग, स्वर, ध्यान, गांधर्ववेद और नाद ब्रह्म को एक-दूसरे से जोड़ती है। उनके लिए संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि ज्ञान, सामंजस्य और अंतर्मन की अनुभूति का मार्ग है।

उनकी जीवन-यात्रा का सार एक ही संकल्प में समाहित है—

“एक ही ध्येय—भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रचार, प्रसार और संरक्षण; संगीत को गाँव से विश्व तक पहुँचाना।”

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