तानसेन
स्वरों के सम्राट, रागों के जादूगर,
तानसेन भारतीय संगीताकाश के वह ध्रुवतारा थे,
जिनकी मधुर वाणी में प्रकृति स्वयं गुनगुनाती थी।
ध्रुपद की गंभीरता और रागों की दिव्यता से अलंकृत,
उनका गायन केवल संगीत नहीं, एक अलौकिक अनुभव था।
कहा जाता है कि उनके स्वरों की शक्ति से
वन्य पशु शांत हो जाते थे,
दीपक राग से दीप प्रज्वलित हो उठते थे,
और मेघ मल्हार से आकाश वर्षा बरसाता था।
उनकी स्वर-लहरियाँ कभी सिंह की गर्जना बन गूँजतीं,
तो कभी पक्षियों की मधुर चहचहाहट में ढल जातीं।
तानसेन केवल एक गायक नहीं थे,
वे संगीत की उस दिव्य परंपरा के अमर प्रतीक हैं
जिसकी प्रतिध्वनि आज भी भारतीय शास्त्रीय संगीत में सुनाई देती है।
— Vedang B. Dharashive
Village Music Club, Almala 🎶🌺































